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महिला विरोधी अषराफों के वर्चस्व के कारण एएमयू में नहीं हो पा रही पसमांदा कुलपति की नियुक्ति

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अलीगढ़ के उपकुलपति के चयन में एग्जीक्यूटिव काउंसिल एवं एएमयू कोर्ट की  महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है, जिसमें सदियों से ज्यादतार अशरफ़ (सैय्यद, शेख़, पठान, मुग़ल आदि) मुस्लिम समाज का वर्चस्व कायम रहा है। इन लोगों ने ऐसे ऐसे हथकंडे अपनाए है कि ये लोग जिसको चाहते हैं वही एएमयू का वीसी बनता रहा है। एग्जीक्यूटिव काउंसिल एवं एएमयू कोर्ट के ज़रिए एएमयू का वीसी सेलेक्ट करना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अप्रासंगिक है। वीसी का कार्य सुचारू रूप से विश्वविद्यालय को चलाना होता है तथा शिक्षा की गुणवता को मजबूत करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना होता है। एएमयू के वीसी चुनने की प्रक्रिया पूर्तायः राजनीतिक, धार्मिक एवं जातपात पर आधारित है। सरकार से अनुरोध है कि इसमें संशोधन करके नई प्रक्रिया लागू करे।
 उपरोक्त बातें ऑल इंडिया पसमांदाम मुस्लिम महाज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद यूनुस ने कही। उन्होंने कहा कि दिनांक 30/10/2023 को एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग में डाक्टर फैजान मुस्तफा, एमयू रब्बानी, प्रो फुरकान क़मर, प्रो. अब्दुल कय्यूम एवं एक मात्र महिला प्रत्याशी प्रो. नईमा खातून प्रधानाचार्य अब्दुल्ला महिला कॉलेज एएमयू को दिनांक 6/11/2023 को एएमयू कोर्ट के पास तीन नामों के पैनल के लिए भेजा गया था। एएमयू कोर्ट ने डाक्टर एमयू रब्बानी, डाक्टर फैजान मुस्तफा एवं महिला प्रत्याशी प्रो. नईमा खातून के नामों का पैनल तैयार कर लिया है और पैनल को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू के पास एएमयू वीसी सेलेक्ट करने के लिए भेजा जाएगा।
वहीं दूसरी ओर संगठन के कार्यवाहक अध्यक्ष शारिक अदीब अंसारी ने कहा कि एएमयू के कट्टरवादी एवम् महिला विरोधी लोग  महिला वीसी बनाने के पक्ष में नहीं हैं, उन्होंने कहा कि एएमयू एक्जीक्यूटिव काउंसिल एवं एएमयू कोर्ट के ज़रिए पहली बार महिला वीसी की प्रत्याशी को  वीसी बनने का मौका मिला है। अतः ऑल इण्डिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ भारत सरकार से अनुरोध करता है कि एएमयू में पहली महिला वीसी बनाने की कृपा करें।